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Freedom fighters of india in hindi हम सबको पता है कि हमारा देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था और इस आजादी पर हम सब भारतवासी को बहुत गर्व है| इस साल हम अपनी आजादी के 68 साल पुरे कर 69 वें साल में प्रवेश करेंगें| हर साल की तरह हम इस साल भी 15 अगस्त को झंडा फेहरायेंगे और 2-4 देश भक्ति गीत गाकर घर आ जायेगें| आजादी का यह दिन अधिकतर लोगों के लिए सिर्फ आम छुट्टी का दिन बन के रह गया है| हम देश में हर त्यौहार तो बड़ी धूम धाम से हफ्ते भर मनाते है लेकिन अपनी सबसे बड़ी आजादी के दिन को मामूली दिन ही समझते है| अगर आज हम आजाद है, अपनी मर्जी से खा सकते है, रह सकते है, अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ा सकते है , अच्छी नौकरी कर सकते है| ये सब उन भारत के स्वतंत्रता सेनानियों की वजह से है, जिन्होंने हमारे देश को आजाद कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी| इन महान Swatantra senani को हम बदले में कुछ नहीं दे सकते है लेकिन कम से कम हम उन्हें इस आजादी के दिन याद तो कर सकते है, उनके बारे में जान तो सकते है|

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ऐसें ऐसें वीरों के नाम स्वर्ण अक्षरों से लिखे है, जिन्होंने अपने अकेले के दम पर अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई शुरू की| हमारे देश में ऐसे वीर योद्धा भी थे, जिन्होंने अपनी युवावस्था में सब कुछ त्याग कर देश की आजादी की लड़ाई में कूद पड़े थे| आज हम ऐसें ही वीरों के बारे में आपको बताएँगे| जिसे पढकर हम अपने इतिहास पर गर्व कर सकते है| आज हमारा भारतवर्ष अंग्रेजों से तो आजाद है, लेकिन भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, बेईमानी ने इसे अपना बंधक बना लिया है| इससे आजादी के लिए हमें एक क्रांति लानी होगी, और हमारे देश के युवा शक्ति को एक बार फिर जगाना होगा| आज हम अपने भारत के स्वतंत्रता सेनानियों (Freedom fighters of india in hindi) के बारे में पढ़कर जानेगें कि कैसे उन्होंने देश की आजादी के लिए जनचेतना और क्रांति को जगाया था|

भारत देश के स्वतंत्रता सेनानी 

Swatantra Senani Freedom Fighters of India in Hindi 

  • रानी लक्ष्मी बाई –भारत देश के उत्तर में झाँसी नाम की जगह है, यहाँ की रानी लक्ष्मी बाई थी| इनका जन्म महाराष्ट्रियन परिवार में हुआ था| उस समय भारत का गवर्नर डलहौजी था, उसने नियम निकाला कि जिस भी राज्य में राजा नहीं है वहां अंग्रेजों का अधिकार होगा| उस समय रानी लक्ष्मी बाई विधवा थी, उनके पास 1 गोद लिया हुआ बेटा दामोदर था| उन्होंने अंग्रेजो के सामने घुटने टेकने से मना कर दिया और अपनी झाँसी को बचाने के लिए उनके खिलाफ जंग छेड़ दी| मार्च 1858 में अंगेजों से लगातार 2 हफ्ते तक युद्ध किया जो वो हार गई थी| इसके बाद वे ग्वालियर चली गई जहाँ एक बार फिर उनका युद्ध अंग्रेजों से हुआ| 1857 में हुई लड़ाई में रानी लक्ष्मी बाई का विशेष योगदान था| इनका नाम भारत के स्वतंत्रता सेनानी (Swatantra Senani / Freedom fighters of india in hindi) मे बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है|
जन्म1828
विवाह1942
जन्म स्थानकाशी (वाराणसी)
पति का नामझाँसी के राजा गंगाधरराव
मृत्यु18 जून 1858
  • लाल बहादुर शास्त्री – आजाद भारत के दुसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी थे| शास्त्री जी ने देश की आजादी के लिए भारत छोड़ो आन्दोलन,नामक सत्याग्रह आन्दोलन और असहयोग आन्दोलन में हिस्सा लिया था| ये देश के भारत के स्वतंत्रता सेनानी  थे| आजादी के समय उन्होंने 9 साल जेल में भी बिताये| आजादी के बाद वे home मिनिस्टर बन गए और फिर 1964 में दुसरे प्रधानमंत्री| 1965 में हुई भारत पाकिस्तान की लड़ाई में उन्होंने मोर्चा संभाला था| “जय जवान जय किसान” का नारा इन्होंने ही दिया था| 1966 में जब वे विदेश दौरे पर थे तब अचानक दिल का दौरा पड़ने से उनकी म्रत्यु हो गई|
जन्म2 अक्टूबर 1904
जन्म स्थानउत्तर प्रदेश
मृत्यु1966
  • जवाहरलाल नेहरु – पंडित जवाहरलाल नेहरु को आज बच्चा बच्चा जनता है| ये भारत के स्वतंत्रता सेनानी थे| इनके पिता मोती लाल नेहरु एक बैरिस्टर और नेता थे| 1912 में नेहरु जी विदेश से अपनी पढाई पूरी करने के बाद भारत में बैरिस्टर की तरह काम करने लगे| महात्मा गाँधी के संपर्क में आने के बाद वे आजादी की लड़ाई में कूद पड़े, और भारतीय कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए| आजादी के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरु देश के प्रथम प्रधानमंत्री बने| आजादी की लड़ाई में वे महात्मा गाँधी के साथ मिल कर अंग्रेजों के खिलाफ खड़े रहे| बच्चों से उन्हें विशेष प्रेम था इसलिए आज भी हम उनके जन्म दिन को बाल दिवस के रूप में मनाते है| दिल्ली में उनका निधन हो गया|
जन्म14 नवम्बर 1889
जन्म स्थानइलाहाबाद
मृत्यु27 मई 1964
  • बाल गंगाधर तिलक – “ स्वराज हमारा जन्म सिध्य अधिकार है और हम इसे लेकर ही रहेंगे|” पहली बार यह नारा बाल गंगाधर तिलक जी ने ही बोला था| बाल गंगाधर तिलक को “भारतीय अशांति के पिता” कहा जाता था| डेकन एजुकेशन सोसाइटी की इन्होंने स्थापना की थी, जहाँ भारतीय संस्कृति के बारे में पढ़ाया जाता था, साथ ही ये स्वदेशी काम से जुड़े रहे| बाल गंगाधर तिलक पुरे भारत में घूम घूम कर लोगों को आजादी की लड़ाई में साथ देने के लिए प्रेरित करते थे| इनकी अंतिम यात्रा में महात्मा गाँधी के साथ लगभग 20 हजार लोग शामिल हुए थे| ये भारत के स्वतंत्रता सेनानी (Swatantra Senani / Freedom fighters of india in hindi) थे|
जन्म23 जुलाई 1856
जन्म स्थानमहाराष्ट्र के रत्नागिरी
मृत्यु1 अगस्त 1920
  • लाला लाजपत राय – लाला लाजपत राय जी पंजाब केसरी नाम से प्रसिद्ध थे| भारतीय नेशनल कांग्रेस के लाला लाजपत राय बहुत प्रसिद्ध नेता और भारत के स्वतंत्रता सेनानी (Swatantra Senani / Freedom fighters of india in hindi) थे| लाला लाजपत राय लाल बाल पाल की तिकड़ी में शामिल थे| ये तीनों कांग्रेस के मुख्य और प्रसिद्ध नेता थे| 1914 में वे ब्रिटेन भारत की स्थिति बताने गए थे लेकिन विश्व युद्ध होने की वजह से वे वहां से लौट ना सके| 1920 में जब वे भारत आये तब जलियाँवाला हत्याकांड हुआ था, इसके विरुद्ध में उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आन्दोलन छेड़ दिया था| एक आन्दोलन के दौरान अंगेजों के लाठी चार्ज से वे बुरी तरह घायल हुए जिसके पश्चात् उनकी म्रत्यु हो गई|
जन्म28 जनवरी 1865
जन्म स्थानपंजाब
मृत्यु17 नवम्बर 1928
  • चंद्रशेखर आजाद – ये भारत के स्वतंत्रता सेनानी (Swatantra Senani /Freedom fighters of india in hindi) थे| चंद्रशेखर आजाद नाम की ही तरह आजाद थे, उन्होंने स्वतंत्रता की आग में घी डालने का काम किया था| उनका परिचय इस प्रकार था,
नामआजाद
पिता का नामस्वाधीनता
पताजेल
मृत्यु27 फ़रवरी 1931
चंद्रशेखर आजाद स्वतंत्रता की लड़ाई में युवाओं को आगे आने के लिए प्रेरित करते थे, उन्होंने युवा क्रांतिकारीयों की एक फ़ौज खड़ी कर दी थी| उनकी सोच थी की स्वतंत्रता की लड़ाई के लिए हिंसा जरुरी है, इसलिए वे महात्मा गाँधी से अलग कार्य करते थे| चंद्रशेखर आजाद का खौफ अंगेजों में बहुत था| इन्होंने काकोरी ट्रेन लूटने की योजना बनाई थी और इसे लुटा था| किसी ने इनकी खबर अंग्रेजों को दे दी, जिससे अंग्रेज इन्हें पकड़ने के लिए इनके पीछे पड़ गए| चंद्रशेखर आजाद किसी अंग्रेज के हाथों नहीं मरना चाहते थे इसलिए उन्होंने अपने आप को गोली मार ली और शहीद हो गए|
  • सुभाषचंद्र बोस – सुभाषचंद्र बोस को नेता जी कहते है इनका जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में हुआ था| 1919 को वे पढाई के लिए विदेश चले गए, तब उन्हें वहां जलियाँवाला हत्याकांड का पता चला जिससे वे अचंभित हो गए और 1921 को भारत लौट आये| भारत आकर इन्होंने भारतीय कांग्रेस ज्वाइन की और नागरिक अवज्ञा आन्दोलन में भाग लिया| अहिंसावादी गाँधी जी की बातें उन्हें गलत लगती थी जिसके बाद वे हिटलर से मदद मांगने के लिए जर्मनी गए| जहाँ उन्होंने इंडियन नेशनल आर्मी (INA) संगठित की| दुसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान जो INA की मदद कर रहा था समर्पण कर दिया, जिसके बाद नेता जी वहां से भाग निकले| लेकिन कहते है 17 अगस्त 1945 को उनका प्लेन क्रेश हो गया जिससे उनकी म्रत्यु हो गई| इनकी म्रत्यु से जुड़े तथ्य आज भी रहस्य बने हुए है|
  • मंगल पांडेय – भारत के इतिहास में स्वतंत्रता सेनानीयों में सबसे पहले मंगल पांडे का नाम आता है| 1857 की लड़ाई के समय से इन्होंने आजादी की लड़ाई छेड़ दी और सबको इसमें साथ देने को कहा| मंगल पांडे ईस्ट इंडिया company में सैनिक थे| 1847 में खबर फैली की ईस्ट इंडिया company द्वारा जो बन्दुक का कारतूस बनाया जाता है उसमें गाय की चर्बी का इस्तेमाल होता है, इसे चलाने के लिए कारतूस को मुह से खीचना पड़ता था, जिससे गाय की चर्बी मुहं में लगती थी जो हिन्दू मुस्लिम दोनों धर्मो के खिलाफ था| उन्होंने अपनी company को बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन कुछ नहीं हुआ| 8 अप्रैल 1857 को इनकी म्रत्यु हो गई|
  • भगत सिंह – भगत सिंह का नाम बच्चा बच्चा जानता है| युवा नेता भगत का जन्म 27 सितम्बर 1907 को पंजाब में हुआ था| इनके पिता और चाचा दोनों स्वतंत्रता की लड़ाई में शामिल थे जिससे बचपन से ही इनके मन में देश के प्रति लगाव था और वे बचपन से ही अपने देश के लिए कुछ करना चाहते थे| 1921 में इन्होंने असहयोग आन्दोलन में अपनी हिस्सेदारी दी, लेकिन हिंसात्मक प्रवति होने के कारण भगत ने यह छोड़ नौजवान भारत सभा बनाई| जो पंजाब के युवाओं को आजादी में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करती थी| चंद्रशेखर आजाद के साथ मिलकर इन्होंने आजादी के लिए बहुत से कार्य किये| 1929 में इन्होंने अपने आप को पकड़वाने के लिए संसद में बम फेंक दिया, जिसके बाद इन्हें 31 मार्च 1931 को राजगुरु और सुखदेव के साथ फांसी की सजा दी गई|
  • भीमराव अम्बेडकर – दलित परिवार में पैदा हुए भीमराव अम्बेडकर जी ने भारत से जाति सिस्टम ख़त्म करने के लिए बहुत कार्य किये| नीची जाति के होने की वजह से उनकी बुधिमियता को कोई नहीं मानता था| लेकिन इन्होंने फिर बुद्ध जाति अपना ली और दूसरी नीची जाती वालों को भी ऐसा करने को कहा, भीमराव अम्बेडकर जी ने हमेशा सबको समझाया की जाति धर्म मानवता से बढ़ कर नहीं होता है| हमें सबके साथ सामान व्यव्हार करना चाहिए| अपनी बुध्दी के बदौलत वे भारत सविधान कमिटी के चेयरमैन बन गए| जनतांत्रिक भारत के संविधान को डॉ भीमराव अम्बेडकर ने ही लिखा था|
  • सरदार वल्लभभाई पटेल – भारतीय कांग्रेस के नेता सरदार वल्लभभाई पटेल एक वकील थे| वल्लभभाई जी ने नागरिक अवज्ञा आन्दोलन, भारत छोड़ो आन्दोलन में हिस्सा लिया था| वल्लभभाई जी ने देश की आजादी के बाद आजाद भारत को संभाला| आजाद भारत बहुत सारे राज्यों में बंट गया था जहाँ पाकिस्तान भी अलग हो चूका था| उन्होंने देश के सभी लोगों को समझाया कि देश की रक्षा के लिए सभी राजतन्त्र समाप्त कर दिए जायेंगे और पुरे देश में सिर्फ एक सरकार का राज्य चलेगा| उस समय देश को ऐसे नेता की जरुरत थी जो उसे एक तार में बांधे रखे बीखरने ना दे| आजादी के बाद भी देश में बहुत परेशानियाँ थी जिसे सरदार वल्लभभाई पटेल ने बहुत अच्छे से सुलझाया था|
  • महात्मा गाँधी – राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात में हुआ था| अहिंसावादी महात्मा गाँधी ने अपनी स्वतंत्रता की लड़ाई पूरी सच्चाई और ईमानदारी से लड़ी| वे अहिंसा पर विश्वास रखते थे और कभी किसी अंग्रेज को गली भी नहीं दी| इस वजह से अंग्रेज उनकी बहुत इज्जत भी करते थे| सत्याग्रह आन्दोनल, भारत छोड़ो आन्दोलन, असहयोग आन्दोलन, साइमन वापस जाओ, नागरिक अवज्ञा आन्दोलन और भी बहुत से आन्दोलन महात्मा गाँधी ने शुरू किये| वे सबको स्वदेशी बनने के लिए प्रेरित करते थे और अंग्रेजो के सामान को उपयोग करने से मना करते थे| महात्मा गाँधी के प्रयासों के चलते अंग्रेजो ने 15 अगस्त 1947 को देश छोड़ दिया| 30 जनवरी 1948 को नाथू राम गोडसे ने गोली मार कर इनकी हत्या कर दी थी|
  • सरोजनी नायडू – सरोजनी नायडू एक कवित्री और सामाजिक कार्यकर्ता थी| ये पहली महिला थी जो भारत व भारतीय नेशनल कांग्रेस की गवर्नर बनी| सरोजनी नायडू भारत के संबिधान के लिए बनी कमिटी की मेम्बर थी| बंगाल विभाजन के समय ये देश के मुख्य नेता जैसे महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरु के संपर्क में आई और फिर आजादी की लड़ाई में सहयोग देने लगी| ये पुरे भारत में घूम घूम कर लोगों को अपनी कविता और भाषण के माध्यम से स्वतंत्रता के बारे में बताती थी| देश की मुख्य महिला सरोजनी नायडू का जन्म दिवस अब महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है|  
  • बिरसा मूंडे – बिरसा मूंडे का जन्म 1875 को रांची में हुआ था| बिरसा मूंडे ने बहुत से कार्य किये, आज भी बिहार व झारखण्ड के लोग इन्हें भगवान की तरह पूजते है और उन्हें “धरती बाबा” कहते है| वे सामाजिक कार्यकर्त्ता थे जो समाज को सुधारने के लिए हमेशा कुछ ना कुछ करते रहते थे| 1894 में अकाल के दौरान बिरसा मूंडे ने अंगेजों से लगान माफ़ करने को कहा जब वो नहीं माने तो बिरसा मूंडे ने आन्दोलन छेड़ दिया| 9 जून 1900 महज 25 साल की उम्र में बिरसा मूंडे ने अंतिम साँसे ली|
  • अशफाक़उल्ला खान – भारत देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अशफाक़उल्ला खान एक निर्भय, साहसी और प्रमुख स्वतंत्रता संग्रामी थे| वे उर्दू भाषा के कवी थे| काकोरी कांड में अशफाक़उल्ला खान का मुख्य चेहरा था| इनका जन्म 22 अक्टूबर 1900 को उत्तर प्रदेश में हुआ था| क्रन्तिकारी विचारधारा के अशफाक़उल्ला खान महात्मा गाँधी की सोच के बिल्कुल विपरीत कार्य करते थे| उनकी सोच थी की अंग्रेज से शांति से बात करना बेकार है उन्हें सिर्फ गोली और विस्फोट की आवाज सुने देती है| तब राम प्रसाद बिस्मिल के साथ मिल कर इन्होंने काकोरी में ट्रेन लुटने की योजना बनाई| राम प्रसाद के साथ इनकी गहरी दोस्ती थी| 9 अगस्त 1925 को राम प्रसाद के साथ अशफाक़उल्ला खान और 8 अन्य साथियों के साथ मिलकर इन्होंने ट्रेन में अंग्रेजो का खजाना लुटा था|
भारत के स्वतंत्रता सेनानी आर्टिकल में आपको देश के महान महापुरषों के बारे में पता चलता है, जिनके जीवन से हम बहुत कुछ सीख कर अपने जीवन में उतार सकते है| आज भी भारत को ऐसे ही क्रन्तिकारीयों की जरुरत है जो देश को भ्रष्टाचार, गरीबी से आजाद कराये| आपको भारत के स्वतंत्रता सेनानी आर्टिकल कैसा लगा और आप किस स्वतंत्रता सेनानी के जीवन से सबसे ज्यादा प्रभावित होते है, मुझसे शेयर करें, मैं आपको उनके बारे में और जानकारी देने का प्रयास करुँगी| आप अपनी बात हमारे कमेंट बॉक्स में जाकर शेयर करें|

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