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बाजीराव मस्तानी इतिहास

संजय लीला भंसाली की बड़े बजट की पीरियड फिल्म बाजीराव मस्तानी आज दर्शकों के सामने आ गई है| फिल्म मराठा साम्राज्य के पेशवा बाजीराव के उपर है| फिल्म की कहानी बहुत ही दमदार है और संजय लीला के प्रोडक्शन में बनके ये और भी भव्य हो गई है| इससे पहले संजय जी ने 2 साल पहले रामलीला बनाई थी जो सुपर हिट रही, इसकी जोड़ी दीपिका रणवीर को संजय जी ने दुहराया है| संजय जी की फिल्मों में ये खासियत होती है कि उनके सेट बहुत बड़े भव्य होते है, जो किसी महल से कम नहीं होते है| संजय जी की यह फिल्म की कहानी उन्होंने हम दिल दे चुके सनम के बाद तैयार कर दी थी जो इनकी इस फिल्म के हिट होने के बाद सलमान व ऐशवर्या पर बनने वाली थी, लेकिन उनका रिश्ता टूटने के बाद फिल्म भी डिब्बा बंद हो गई थी| अब संजय सर ने लगभग 15 साल बाद इस फिल्म पर काम किया है|

बाजीराव मस्तानी फिल्म से संबंधित अन्य जानकारी –
कलाकारदीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, प्रियंका चोपड़ा, महेश मांजरेकर
निर्मातासंजय लीला भंसाली
निर्देशकसंजय लीला भंसाली
लेखकसंजय लीला भंसाली
संगीतसंजय लीला भंसाली, संचित बलहारा
रिलीज़ डेट18 दिसम्बर 2015 
बाजीराव मस्तानी फिल्म निर्देशक समीक्षा –
डायरेक्टर – संजय लीला भंसाली
संजय जी जैसे डायरेक्टर के साथ हर कोई कलाकार काम करना चाहता है, उनकी डायरेक्शन, सिनेमेटोग्राफी, सेट्स सब देखने लायक होते है| दीपिका रणवीर जैसे नए कलाकारों के लिए ये सौभाग्य की बात है कि संजय जी के साथ उन्हें दूसरी फिल्म करने का मौका मिला| संजय जी ने उनकी कला को अच्छी तरह परखा और उसके अनुरूप उनसे काम करवाया है| संजय जी फिल्म से जुड़े हर काम में बहुत बारीकी से काम करते है|

बाजीराव मस्तानी इतिहासbajirao mastani history in hindi

बाजीराव बल्लाल पेशवा मराठा साम्राज्य के राजा थे जो बहुत साहसी और हिंदूवादी थे| उनका सपना पुरे भारतवर्ष को हिन्दू राष्ट्र बनाने के था| बाजीराव ने बहुत कम समय में लगभग आधे भारत को जीत लिया था| उनका सपना था दिल्ली में भी मराठा का ध्वज लहराए| उत्तर से दक्षिण व पूर्व से पश्चिम हर तरफ उनके बहादुरी के चर्चे थे| दिल्ली में उस समय अकबर का राज था लेकिन अकबर भी बाजीराव की बहादुरी, साहस व युध्य निपुर्न्ता को मानता था| बाजीराव ने लगातार 40 लड़ाईयां जीती थी|
मुग़ल से बाजीराव लड़ाई की तैयारी में थे वे दिल्ली पर हमला करना चाहते थे| इस समय वे अपने घर से दूर थे, यही उनसे मिलने मस्तानी (दीपिका) आती है| मस्तानी बुंदेलखंड की राजकुमारी थी उस समय मुग़ल वहां राज्य करने लगते थे, तो मस्तानी बाजीराव से मदद लेने आती है| मस्तानी राजा छत्रसाल की बेटी थी इनकी माँ मुस्लिम थी| मस्तानी से मिलकर बाजीराव बहुत प्रभावित होते है, वे उनकी बहादुरी के कायल हो जाते है और उनकी मदद करने को तैयार हो जाते है| समय के साथ वे एक दुसरे से प्रेम करने लगते है|
बाजीराव अब घर लौटते है जहाँ उनकी पत्नी कशी (प्रियंका चोपड़ा) बेसब्री से उनका इंतजार कर रही होती है| कशी इस बात से अंजान थी कि उनके पति किसी को पसंद करने लगे है व भूलवश शादी भी कर बैठे है| बाजीराव और मस्तानी दोनों अलग धर्म के थे जिससे से पुरे साम्राज्य के लिए बहुत बड़ा मुद्दा बन गया था, उनकी प्रजा अपने राजा का ये रूप कतई स्वीकार नहीं करना चाहती थी| हिन्दू मुस्लिम के रिश्ते उस समय भी उतने ही उलझे थे जितने आज, कैसे दो अलग धर्म के लोगों की प्रेम कहानी पूरी होती है? काशी बाई अपने पति को कैसे माफ़ करती है? ये सब देखने आपको सिनेमाघर जाना होगा|
इस फिल्म को बनाते समय संजय जी सामने एक और चुनौती थी, वो यह की आशुतोष गोवारिकर की फिल्म जोधा अकबर भी एक एतिहासिक प्रेम कहानी थी जो दर्शकों को बहुत पसंद आई थी, फिल्म में बहुत पैसा लगाया गया था, जिसमें दमदार कलाकार थे, फिल्म को भव्य रूप दिया गया था| संजय जी जानते थे उनकी फिल्म को उससे compare जरुर किया जायेगा इसलिए वे किसी भी रूप में उससे कम नहीं रहना चाहते थे| एतिहासिक प्रेम कहानी को बनाते समय पुरानी सच्चाई और आज के समाज दोनों को देखकर चलना होता है| किसी की भी धार्मिकता को ठेस ना पहुंचे और सच्चाई के साथ साथ फिल्म में ड्रामा भी दिखाना जरुरी होता है|
बाजीराव का मस्तानी के प्रति प्रेम अद्भूत था, उनका मकसद कभी बुरा नहीं था, वो मस्तानी व अपनी पत्नी काशी बाई दोनों से हो प्रेम रखते थे| मस्तानी भी बाजीराव से प्रेम करती थी और पुरे समाज के सामने अपने प्यार के लिए कड़ी हो जाती है| काशी बाई अपने पति के लिए अपना सुहाग त्यागने तैयार हो जाती है| इमोशन ड्रामा प्यार त्याग से भरी ये प्रेम कहानी एपिक है जिसे दर्शक देखना पसंद करेंगें| फिल्म के डायलोग बहुत जोरदार है, रामलीला की तरह इसमें भी ऐसे डायलोग है जो लोगों को लम्बे समय तक याद रहने वाले है|
फिल्म में युद्ध वाले सीन थोड़े कमजोर है, क्यूंकि डायरेक्टर का पूरा ध्यान प्रेम कहानी दिखाने में ही था| फिल्म का पहला भाग आपको बांधे रखेगा, दुसरे भाग में कहानी थोड़ी भागती नजर आती है| फिल्म का क्लाइमेक्स भी थोडा निराश करता है संजय जी को इसको कुछ और तरीके से लिखना था और दुसरे ढंग से दिखाना था|
बाजीराव मस्तानी फिल्म कलाकारों की समीक्षा –
रणवीर सिंह हर बार कुछ नया दिखा जाते है, रामलीला में उनके काम को बेस्ट कहा था लेकिन इस फिल्म को देखने के बाद ये उनका बेस्ट काम लग रहा है| इस फिल्म के लिए वो क्यों बेस्ट है उन्होंने अपने काम से प्रूव कर दिया है| डायलोग बोलने से लेकर हर काम रणवीर ने परफेक्ट किया है| मराठी भाषा को अपने अंदर पूरी तरह से उतार लिया|
दीपिका बाकि किरदार के आगे कम लग रही है, वे सुंदर तो दिखी है लेकिन बॉडीलैंग्वेज काफी मॉडर्न रही जो मैच नहीं कर रही थी राजकुमारी मस्तानी से| एक जगह तो वे ऐसे डायलोग बोल रही थी जैसे तमाशा फिल्म में बोला था|
प्रियंका प्रोमोशन में तो नहीं दिखी लेकिन फिल्म में बहुत अच्छे से दिखी है| उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है, दोनों लीड एक्टर के आगे किरदार छोटा था लेकिन जितना उनसे बोला गया वो बखूबी उन्होंने किया है|
बाजीराव मस्तानी फिल्म संगीत समीक्षा –
संजय जी की पहले की फिल्मों की अपेक्षा इस फिल्म का संगीत उतना दमदार नहीं है| पिंगा, दीवानी गानों में कोरेओग्रफी काफी अच्छी है लेकिन म्यूजिक ठीकठाक है| बाकि और कोई भी गाने दर्शकों में छाप नहीं छोड़ पाए है|
बाजीराव मस्तानी फिल्म ओवरआल परफॉरमेंस –
फिल्म को किसी कलाकार के फैन होने की हैसियत से नहीं बल्कि संजय जी के बेस्ट काम को देखने के लिए देखें| रणवीर का सबसे उन्दा काम आपको इस फिल्म में देखने को मिलेगा| फिल्म को एक बार देखा जा सकता है, जिसे देखते वक़्त आप बोर नहीं होंगें|

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