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नेपाल भूकंप त्रासदी

25 अप्रैल के दिन सुबह के करीब 11:45 का समय होगा दुनिया के कई हिस्सो मे धरती अचानक कापने लगी। सबसे ज्यादा असर हुआ नेपाल मे तथा भारत के कुछ हिस्सो मे नेपाल मे इसका असर ज्यादा था इसे 1991 मे आए भूकंप के बाद का सबसे भयावह भूकंप कहा जा रहा है । अभी लोग भूकंप से लोगो को राहत मिली भी ना थी कि अचानक बारिश की खबरे आने लगी परिणाम यह हुआ कि आज दिनाक 29 अप्रैल तक नेपाल मे 5000 से ज्यादा तथा भारत मे करीब 63 लोगो के मरने की खबर आई तथा नेपाल मे प्रधान मंत्री द्वारा 28 अप्रैल को कहा गया की यह मरने वालो का आँकड़ा 10000 को पार कर सकता है। करीब 7000 लोग घायल है जो अब भी अस्पतालो मे अपना इलाज करवा रहे। आज 5 दिन बाद अब भी मलबे मे से लाशों तथा जिंदा लोगो का निकलना जारी है ।

Nepal Bhukamp Earthquake In Hindi
इन सब आपदाओ के बावजूद काठमांडू स्तिथ पशुपतिनाथ मंदिर को कोई नुकसान नही पहुचा यह बाद पत्रकार नलिनी सिंह ने भूकंप के कुछ देर बाद टिवीटर पर कही । परंतु नेपाल की पहचान कही जाने वाली कई इमारते मट्टी मे मिल गयी । युनेस्को की विश्व विरासत सूची मे शामिल 900 साल पुराना दरबार स्कवेयर तबाह हो गया । 400 साल पुराना काष्टमंडप भी ढह गया इसी के नाम पर शहर का नाम काठमांडू पड़ा। 104 साल पुराने जानकी मंदिर को भी क्षति पहुँची है । इसके साथ साथ 183 साल पुरानी नेपाल की कुतुम्बमिनार कही जाने वाली इमारत भी डह गयी इसका सिर्फ 33 प्रतिशत हिस्सा ही बचा रह गया। इसके साथ ही कई बड़ी बड़ी इमारते धराशाही हो गयी।
  भूकंप के 4 दिन बाद भी लोगो का जिंदा निकलना बाकी है । काठमांडू के पास कलंकी मे तीन मंज़िला लुम्बिनी गेस्ट हाउस गिर गया परंतु जब 2 दिन बाद यहा का मलबा हटाया गया तो यहा उम्मीद के विपरीत 12 लोग जिंदा मिले। एक 7 मंज़िला इमारत मे दूसरी मंजिल पर फसे ऋषि नाम के व्यक्ति को 80 घंटे बाद जिंदा निकाला गया हाँलाकि इनके दोनों पैर टूट चुके है पर जान अब भी बाकी है । इसी तरह 50 घंटे बाद सुनीता नाम की महिला की 5 मंजिल इमारत से जिंदा निकाला गया ।
जब नेपाल मे भूकंप की खबर मिली उसी वक़्त काठमांडू हवाई अड्डे को बन्द किया गया तथा सभी फ्लाइट्स भारत की और मोड दी गयी। हालत यह हो गए की नेपाल के राष्ट्रपति राम बरन यादव को भी तम्बू मे रात गूजारनी पड़ी। भूकंप के तुरंत बाद भारत नेपाल के ऑपरेशन मैत्री ने रफ्तार पकड़ ली भूकंप के तुरंत बाद राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ़ की 10 टीम नेपाल भेजी गयी तथा 6 और टीमे भेजने की घोषणा की गयी। 13 मिलिट्री एयर क्राफ्ट, 50 टन पानी और अन्य सामग्री भेजी गयी। एक मानव रहित एरियल भी भेजा गया ताकि नुकसान का जायजा लिया जा सके। मंत्रालय के कई मंत्री तथा विदेशी राजदूत भी त्रासदी का आँकलन करने पहुँचे ।  आज भारतीय सेना ने यह घोषणा भी की, कि भारतीय सेना जिसमे करीब 38000 नेपाली लोग काम करते है की कई टुकड़िया राहत कार्य के लिए नेपाल भेजी जाएगी।
जहा भूकंप से 80 लाख लोग प्रभावित हुये है इनमे 50 हजार गर्भवती महिलाए भी शामिल है । इनकी हालत सबसे खराब है कहा जा रहा है की महिला और बाल मृत्यु दर 14 गुना तक बढ़ने का खतरा है। इन सब के बावजूद जो खतरे से बाहर है तथा जिन्होने नवजात को जन्म दिया है वह भी परेशान है महिलाए बच्चो के तम्बू मे जन्म दे रही है इनके लिए अस्पताल मे रहने के लिए जगह नही है तथा घर अब बचे नही है।
बारिश और भूकंप के बाद नेपाल पर अब महामारी का खतरा मंडरा रहा है कई लोग नेपाल छोड़कर जाने को मजबूर है कल से आज तक करीब 250000 लोग नेपाल छोड़ चुके है। और जो लोग वहा है वो जीने की जरूरतों के लिए लड़ रहे है खाने तथा पीने के पनि के लिए भी समान नही है। दवाइयो की कमी है । परंतु लोग अब अपने घरो की और बड रहे है तथा अपने घर जाने लिए बसो मे अपनी बारी का इंतजार कर रहे है ।  

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