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मांझी द माउंटेन मैन फिल्म समीक्षा रिव्यु

मांझी द माउंटेन मैन फिल्म देखने जाने से पहले एक बार उसके रिव्यु जरुर पढ़ लें| नवाजुद्दीन सिद्दकी जैसे उन्दा कलाकार की फिल्म मांझी दर्शकों के सामने आ गई है| फिल्म मांझी बिहार के दशरथ मांझी के जीवन की सच्ची घटना पर आधारित है| दशरथ एक दलित है, जो गह्लोर, बिहार का रहने वाला है| डॉ भीमराव अम्बेडकर पहले ऐसे दलित थे, जिन पर फिल्म बनी थी| अब दशरथ दुसरे स्थान पर है, जो दलित है और hindi फिल्म उन पर बनी है| दशरथ का कुछ साल पहले  17 अगस्त 2007 को देहांत हो चूका है, और उनकी पूण्यतिथि में मांझी फिल्म की पूरी टीम उनके गाँव गई थी|

मांझी – द माउंटेन मैन फिल्म निर्देशक की समीक्षा (Manjhi-the Mountain Man Film Director Review) –
मांझी फिल्म के निर्देशक केतन मेहता है| केतन मेहता ने इससे पहले आमिर के साथ “मंगल पांडे” बनाई थी| बायोपिक फिल्म में केतन का कोई जवाब नहीं, बायोपिक फिल्म को केतन बेहतरीन तरीके से पेश करते है| केतन ने नवाजुद्दीन सिद्दकी को लेकर अपनी फिल्म में चार चाँद लगा दिए| फिल्म में हर एक सीन पर बारीकी से काम किया गया है| मांझी को जब भूख व प्यास से तड़पते दिखाया जाता है, तब लगता है, मानो सच में किसी गरीब की व्यथा देख रहे है| डाक्यूमेंट्री और कमर्शियल फिल्म के बीच जो जरा सा अन्तर होता है, उसे केतन ने बड़े ही अच्छे ढंग से सबको समझाया है|
मांझी – द माउंटेन मैन मूवी से संबंधित अन्य जानकारी –
कलाकारनवाजुद्दीन सिद्दकी, राधिका आप्टे, तिग्मांशु धुलिया, गौरव द्वेदी
निर्मातादीपा सही, नीना लाथ गुप्ता
निर्देशककेतन मेहता
लेखककेतन मेहता, महेंद्र झाकर, अंजुम राजबली
संगीतसन्देश शंदिलिया
रिलीज़ डेट21 अगस्त 2015

मांझी द माउंटेन मैन फिल्म समीक्षा रिव्यु

Manjhi – The Mountain Man film Review in hindi

दशरथ मांझी को माउंटेन मैन कहा जाता है, उसके गाँव के सभी लोग उसे पहाड़तोडू कहते है| यह कहानी अपने आप में विचित्र लेकिन सच्ची है| हम शहरी लोग शायद कभी इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते है| फिल्म की कहानी शुरू होती है 1960 में बिहार के गाँव गह्लोर से| जहाँ दशरथ मांझी नाम का गरीब मजदुर होता है| आजादी के लगभग 20 साल बाद भी वहां कुछ नहीं बदलता, अभी भी गावं में छुआछूत, जमीदारी और बालविवाह जैसी कुप्रथा प्रचलित है| दशरथ का बाल विवाह कर दिया जाता है, उसके पिता जमीदार को पैसे नहीं दे पाते जिससे वे दशरथ को उसे बेच देते है| दशरथ इस गुलामी से बचने के लिए गावं से भाग जाता है और 7 साल बाद लौटता है| इतने साल बाद भी गावं में कुछ नहीं बदलता, वह पहले जैसा ही कुप्रथा से भरा रहता है|
दशरथ अब अपनी पत्नी फगुनिया (राधिका आप्टे) के साथ खुशहाल जीवन व्यतीत करता रहता है| उसके गाँव में एक पहाड़ होता है, जिसे चढ़कर ही शहर जाया जा सकता है| किसी भी इमरजेंसी के लिए गांववालों को उस पहाड़ को चढ़ कर शहर जाना होता था| एक दिन उसकी गर्भवती पत्नी गिर जाती है, जिसे शहर ले जाने के लिए वे पहाड़ चढ़ते है लेकिन बीच में ही उसकी म्रत्यु हो जाती है| पत्नी के मरने से मांझी बेहद उदास होता है और उसे उस पहाड़ पर बेहद गुस्सा आता है , जिसके बाद वह ठान लेता है कि वह इस पहाड़ को तोड़ कर रहेगा और गाँव से शहर का रास्ता बनाएगा| उसके जीवन का उद्देश्य होता है करूँगा या मरूँगा| एक हथोड़ा उठाये वह निकल पड़ता है विशाल पहाड़ को काटने| 360 फीट लम्बे और 30 फीट चौड़े पहाड़ को काटने में उसे 22 साल लग जाते है| जिसको इस फिल्म के माध्यम से बताया गया है|
मांझी – द माउंटेन मैन फिल्म कलाकारों की समीक्षा (Manjhi-the Mountain Man Movie Character Review)–
मांझी के किरदार में नवाजुद्दीन सिद्दकी ने बहुत अच्छा कार्य किया है| उन्होंने अपने किरदार को जीवंत करने के लिए बहुत मेहनत की है| अभी तक जितनी भी उनकी फ़िल्में आई है सभी में नवाजुद्दीन की एक्टिंग की तारीफ जम के हुई है, वे एक मंझे हुए एक्टर है, जो कठिन से कठिन किरदार को भी सरसता से दिखाते है| नवाजुद्दीन ने असली दशरथ के जीवन को अपने कठिन परिश्रम के चलते चरितार्थ कर दिया है|
मांझी की पत्नी के रूप में राधिका भी अच्छी लगी है, लेकिन उन्हें अपनी अदाकारी दिखाने का ज्यादा मौका नहीं मिल पाया है| राधिका जितनी देर भी स्क्रीन पर दिखी है, सबको अपनी ओर आकर्षित किया है| राधिका मराठी फिल्मों की जानि मानी अभिनेत्री है| नवाजुद्दीन के साथ राधिका की जोड़ी अच्छी लगी है|
फिल्म के अन्य किरदार तिग्मांशु , गौरव ने भी अच्छा काम किया है| तिग्मांशु ने मुखिया का किरदार निभाया है, जिसे देखकर उनकी फिल्म गैंग्स ऑफ़ वास्सेपुर की याद आ जाती है|
मांझी – द माउंटेन मैन फिल्म की खामियाँ –
अगर कोई कमर्शियल फिल्म समझकर इसे देखने जाता है तो उसके हाथों निराशा लगेगी| फिल्म में जबदस्ती का कोई मसाला भी ऐड नहीं किया गया है, ना एक्शन है ना कोई आइटम सोंग| फिल्म में कहानी मांझी के इर्द गिर्द ही घुमती है| निर्देशक को मांझी के बच्चों पर भी फोकस करना चाहिए था| जब उसके बच्चे बड़े हो जाते है, तब मांझी और उनके रिश्तों को विस्तार से दिखाना चाहिए था|
मांझी – द माउंटेन मैन फिल्म संगीत समीक्षा (Manjhi-the Mountain Man Movie Songs Review) –
फिल्म की कहानी ही सब कुछ है, इसमें जबरदस्ती के गाने डाल कर इसकी कहानी के साथ छेड़ छाड़ नहीं की गई है| फिल्म में म्यूजिक सन्देश शंदिलिया ने दिया है, जो अच्छा है| बैकग्राउंड म्यूजिक के लिए इनकी तारीफ बनती है|
मांझी – द माउंटेन मैन फिल्म ओवरआल परफॉरमेंस  –
फिल्म में डायरेक्टर ने एक आम आदमी मांझी को हीरो बनाकर बेचा है| डायरेक्टर से लेकर कैमरामैन तक सभी ने बेहतरीन काम किया है| फिल्म बिहार प्रष्टभूमि है जिससे सभी किरदारों में एक बिहारीपैन होना जरुरी है| नवाजुद्दीन, राधिका और अदि सभी कलाकारों ने बिहारी भाषा का बखूबी इस्तेमाल किया है| नवाजुद्दीन ने तो ऐसे बिहारी बोली है जैसे वे यही के रहने वाले है|
सिफ़ारिश मांझी – द माउंटेन मैन मूवी के लिए –
अगर आप अच्छी कहानी, एक्टिंग देखने के इच्छुक है तो यह फिल्म देखने जरुर जाएँ| कुछ समय पहली आई मसान फिल्म को भी सबने पसंद किया था| ऐसी फिल्मों के अलग ही वर्ग के दर्शक होते है| इस तरह की फिल्मों का हमारे देश में चलने का मतलब है कि लोगों को अब फिल्मों की समझ हो रही है| एक और बात जो मै आपको बताना चाहती हूँ, मांझी फिल्म आज 21 अगस्त को रिलीज हुई है, लेकिन यह फिल्म 1 हफ्ते पहले ही टोरेंट पर लीक हो गई थी| यह बहुत दुखद बात है कि इतनी अच्छी कहानी और नवाजुद्दीन जैसे हीरो के साथ हुआ| यह बात hindi सिनेमा पर एक सवाल खड़ा कर देती है| हमारे देश के बड़े अभिनेता की फिल्मों के साथ तो कभी ऐसा नहीं हुआ तो फिर नवाजुद्दीन जैसे अच्छे अभिनेता के साथ ऐसा क्यों हुआ| इस घटना पर कारवाही चल रही है|
आप सभी से हमारी गुजारिश है कि आप अपने पुरे परिवार के साथ यह फिल्म सिनेमाघर में जाकर देखें| आप इस फिल्म से जुडी अपनी प्रतिक्रिया भी हमारे साथ साझा करे|

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