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बड़ा खुलासा- पुखरायां ट्रेन हादसे में था ISI का हाथ



पुखरायां में लगभग दो माह पहले इन्दौर पटना एक्सप्रेस ट्रेन के दुर्घटना के तार आईएसआई से जुड़े होने की जानकारी मिली है | बिहार के मुतिहारी से पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है | माना जा रहा है कि कानपुर की घटना में भी उक्त आरोपियों का हाथ हो सकता है | हादसे की जांच कर रही जीआरपी सीबीआई और एटीएस की टीमें मंगलवार को कानपुर से बिहार के लिए निकल गई है | मामले पर एसएसपी आकाश कुलहरि से बातचीत की गई तो उनका कहना था कि बिहार पुलिस ने कुछ लोगों को अरेस्ट किया है | कानपुर एटीएस वहां के लिए निकल गई है। जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है | बता दें कि पत्रिका ने हादसे के बाद ट्रैक काटे जाने और आंतकी साजिश के तहत खबर फ्लैश की और लगातार इस पर पड़ताल की | जो सूत्र बता रहे थे कि कानपुर में जितने ट्रेन हादसे हुए उनमें सिमी संगठन के हाथ के तहत टीमें जांच कर रही थीं |
150 से ज्यादा लोगों की हुई थी मौत
इंदौर-पटना एक्सप्रेस का 20 नवंबर को पुखरायां के पास एक्सीडेंट हो गया था | उस हादसे में करीब 150 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी | बताया जाता है कि इस पूरे रैकेट के पीछे दुबई में बैठा एक शख्स है जो भारत में तबाही के लिए नेपाल के भाड़े के टट्टुओं का इस्तेमाल कर रहा है | उसका नाम शमसुल होदा बताया जाता है जो पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़ा हुआ है | संदिग्धों की गिरफ्तार से मिल रहे इनपुट के बाद एटीएस ने अपनी एक टीम बिहार के लिए रवाना कर दी है और बड़े खुलासे की संभावना बताई जा रही है | रुरा, मंधना और शुक्लागंज में भी पटरी काटी गई थीं, जिनकी जांच खूफिया एजेंसियां कर रही हैं | मंधना में ट्रैक को दो लोग काट रहे थे तभी प्रेट्रोलिंग कर रही टीम की नजर इन पर पड़ी तो वह मौके से फरार हो गए | मौके के ट्रैक काटने के ब्लेड भी पुलिस ने बरामद किए थे | इसी के बाद ट्रैन हादसों की जांच सीबीआई एटीएस को सौंपी गई थी | इतना ही नहीं एटीएस ने मंधना से कई लोगों को अरेस्ट भी किया था और इनसे पूछताछ की थी |
कुछ इस तरह हुआ खुलासा
एक अक्टूबर को रक्सौल दरभंगा रेल लाइन पर एक बम बरामद हुआ | पुलिस ने बम डिफ्यूज कर दिया | इसी के बाद पुखरायां में 20 नवंबर को रेल हादसा हुआ | लेकिन असली कहानी 25 दिसंबर से शुरू,होती है जब पूर्वी चंपारण के आदापुर इलाके से चाचा और भतीजा के गायब होने की सूचना पुलिस को मिलती है | पुलिस अभी उनकी खोजबीन कर ही रही थी कि उनका शव 28 दिसंबर को उसी इलाके में बरामद हो जाता है | पुलिस ने हत्या के मामले में तीन आरोपपी मोती पासवान, उमाशंकर पटेल और मुकेश यादव को अरेस्ट किया | तीनों से पुलिस जब कड़ाई से पूछताछ करती है तब इस कहानी में नया मोड़ आता है |
ट्रेन उड़ाने के ली थी सुपारी
चाचा-भतीजा ने ही घोडासहन में ट्रेन उड़ाने की सुपारी ली थी | सुपारी देने वाले का नाम है ब्रज किशोर गिरी जो नेपाल का निवासी है | नेपाल में भी ब्रजकिशोर के साथ दो अन्य आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं जिनके नाम हैं मुजाहिर अंसारी और शंभूगिरी | पूर्वी चंपारण के एसपी जितेंद्र राणा ने बताया कि चाचा-भतीजा की हत्या इसलिए की गई क्योंकि वो अपने मिशन में फेल हो गए थे | ट्रेन कैे गुजरने के दौरान वो पटरी पर बलास्ट नहीं कर पाए | इस साजिश में कुल 10 आरोपी हैं जिनमें दो की हत्या हो चुकी है और 6 को गिरफ्तार कर लिया गया है तीन को बिहार में और तीन को नेपाल में. दो आरोपी अभी भी फरार हैं |
गिरफ्तार आरोपियों ने उगले राज
गिरफ्तार अपराधियों में शामिल मोती पासवान ने बताया कि कानपुर में 20 नवंबर को हुए रेल हादसे की साजिश
आईएसआई ने रची थी। उसे अंजाम देने में वह भी शामिल था। उसके साथ कानपुर में कई अन्य लोग भी थे। उनमें से दो जुबैर और जियायुल दिल्ली में पकड़े जा चुके हैं। पूर्वी चंपारण के एसपी जितेन्द्र राणा के समक्ष उसने दोनों की तस्वीर देखकर पहचान की। मोती ने ये भी बताया कि कानपुर से पहले पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन स्टेशन के पास रेल ट्रैक और चलती ट्रेन को उड़ाने की साजिश भी आईएसआई ने ही रची थी। इसके लिए नेपाल में गिरफ्तार ब्रजकिशोर गिरी ने आदापुर निवासी अरुण और दीपक राम को तीन लाख रुपए दिए थे।

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