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बैंकों में जमा आपका पैसा कभी भी हो सकता है जब्त,सरकार का यह नियम जरूर पढ़ें नहीं तो भुगतना पड़ेगा नुकसान


मोदी सरकार का एक प्रस्तावित कानून इन दिनों काफी चर्चा में है, जिसमें तमाम तरह की बातें कही जा रही हैं कि अब बैंकों में आपका पैसा सुरक्षित नहीं रहेगा,आपके पैसे को सरकार कभी भी जब्त कर सकती है। इस बिल की चर्चा ग्वालियर में भी है। शहर का आम आदमी भी इस बिल को लेकर काफी परेशान है। एफडीआरआई बिल (फाइनेंशियल रिजोल्यूशन एंड डिपोजिट इंश्योरेंस बिल) को लाने के प्रस्ताव पर जून में मोदी केबिनेट ने अपनी सहमति दी थी।


लीड बैंक मैनेजर दीपक जैन ने बताया कि अगस्त में इसे लोकसभा में पेश किया गया और संसद की संयुक्त समिति इस बिल पर अपनी रिपोर्ट 15 दिसंबर से शुरू होने जा रहे शीत सत्र में सौंप सकती है। इस बिल को लाने का उद्देश्य बैकिंग,इंश्योरेंस और अन्य फाइनेंशियल सेक्टर की संस्थाओं,कंपनियों के लिए दीवालिया जैसी हालत होने पर एक्शन का फ्रेमवर्क तैयार करना है।
 साथ ही बड़े स्तर पर जमाकर्ताओं के हितों का भी ध्यान रखना है कि आखिर क्या है ये बिल? क्यों ला रही है सरकार? सरकारे के इरादे और दावे क्या हैं और किन वजहों से लोगों में इस प्रस्तावित बिल को लेकर तमाम शंकाएं हैं, उन सबको इस पूरे मुद्दे से जुड़ी पूरी जानकारी आपको इस खबर में दी जा रही है।

जानिए क्या है एफडीआरआई बिल 
इस बिल के तहत सार्वजनिक क्षेत्र (पीएसयू बैंकों) को यह अधिकार दिया जा सकता है कि दिवालिया होने की स्थिति में बैंक खुद ये तय करेगा कि जमाकर्ता को कितने पैसे वापस करने हैं। यदि बैंक डूबता है तो जमाकर्ता के सारे पैसे भी डूब सकते हैं। जिसको लेकर लोगों में तमाम तरह की बाते की जा रह हैं। जिसको लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि बिल से कम रकम जमा करने वाले उपभोक्ताओं को कोई नुकसान नहीं होगा। साथ ही कहा कि सरकार इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि वो जमाकर्ताओं के धन की रक्षा करेगी। यह सरकार की जिम्मेदारी है।
 यह है एफडीआरआई का नया नियम 
एफडीआरआई बिल का नया नियम के मुताबिक अगर बैंक में आपकी 10 लाख रुपए की राशि जमा है और अगर बैंक डूबे तो केवल 1 लाख रुपये की राशि वापस मिलेगी। बाकी पैसा बैंक खुद को संभालने के लिए आपका पैसा निगल जाएगा। इन सब के बाद आप कोर्ट में केस भी नहीं कर पाएंगे, क्योंकि सरकार ने खुद ही बैंक को ये अधिकार दे रखा है। बैंक हर जमाकर्ता को एक लाख रुपए की गारंटी देता है। ये गारंटी डीआईसीजीसी के तहत मिलती है।
 इसका मतलब ये है कि अगर जमाकर्ता ने 50 लाख रुपए भी जमा कर रखे हैं और अगर बैंक डूबता है कि सिर्फ एक लाख रुपए ही मिलने की गारंटी है। बाकी रकम असुरक्षित क्रेडिटर्स के क्लेम की तरह डील किया जाता है। यानि मौजूदा नियम में यह प्रावधान है कि दिवालिया होने की स्थिति में बैंक को एक निश्चित राशि जमाकर्ता को वापस करनी होगी,लेकिन नए नियम को लेकर अफवाह ये है कि बैंक खुद तय करेंगे तो आपको कोई रकम दी भी जाए या नहीं,और अगर दी जाए तो कितनी रकम दी जाए।
 इन बैंकों का एसबीआई में हुआ विलय
भारतीय महिला बैंक,स्टेट बैंक ऑफ पटियाला,स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर ,स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर,स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर

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