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Breaking: कई राज्यों ने घटाया टैक्स, अब पांच रुपए सस्ता मिलेगा पेट्रोल-डीजल

भोपाल। गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ ने गुरुवार शाम को पेट्रोल-डीजल के दाम कम कर दिए। केंद्र सरकार के फैसले के बाद कई राज्यों ने यह कदम उठाया है। अब इन राज्यों में पेट्रोल-डीजल के भाव पांच रुपए सस्ते हो जाएंगे। थोड़ी देर में ही मध्यप्रदेश सरकार भी ऐसी ही घोषणा कर सकती है।



मध्यप्रदेश पेट्रोल-डीजल उपभोक्ताओं के लिए गुरुवार को राहत की खबर आई है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को ढाई रुपए पेट्रोल और डीजल पर कम करने की घोषणा की, साथ ही राज्य सरकारों से भी आग्रह किया कि वो भी ढाई रुपए पेट्रोल और डीजल पर से घटा देंगे तो उपभोक्ताओं को पांच रुपए सस्ता पेट्रोल-डीजल मिलने लगेगा। इसके बाद कई राज्यों ने अपने यहां से ढाई रुपए घटाने का फैसला ले लिया।
मध्यप्रदेश में घोषणा थोड़ी देर में
अन्य राज्यों की तरह ही मध्यप्रदेश में भी घोषणा का इंतजार किया जा रहा है। चुनावी राज्य होने के कारण तय माना जा रहा है कि यहां भी पेट्रोल-डीजल के भाव कम कर दिए जाएंगे।

इन राज्यों ने घटाया वैट
केंद्र सरकार के आग्रह पर गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, त्रिपुरा और छत्तीसगढ़ सरकार ने भी पेट्रोल-डीजल के दामों में कमी कर दी है। जिन राज्य सरकारों ने यह कमी की है उनके यहां जल्द ससे जल्द पांच रुपए सस्ता डीजल और पेट्रोल मिलने लगेगा।

क्या कहा था वित्तमंत्री ने
नई दिल्ली में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को दोपहर में प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि तेल कंपनियां विदेशी बांड से पैसा जुटाएगी। तेल के दाम पर जल्द ही काबू कर लिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में महंगाई काबू में है। अर्थ व्यवस्था को काबू में करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।

राज्य सरकारें से भाव कम करने का आग्रह
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि हमने राज्य सरकारों से भी आग्रह किया है कि ढाई रुपए केंद्र सरकार और ढाई रुपए राज्य सरकारें कम कर सकती हैं। हम इस बारे में मुख्यमंत्रियों से भी बात करेंगे कि वे अपने वेट में ढाई रुपए कम करने का निर्णय लें। जिससे पांच रुपए डीजल और पेट्रोल की कीमतों में रियायत मिल सके।

और क्या बोले वित्तमंत्री
वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि करंसी बाजार में भी उतार-चढ़ाव है।
-शेयर बाजार भी काफी गिरा है।
अंतरराष्ट्रीय वजहों से कच्चे तेल के भाव बढ़े हैं।
-सरकार का डायरेक्ट टेक्स कलेक्शन बढ़ा है।
-अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दबाव है।
-तेल कंपनियां विदेशी बांड से पैसा जुटाएगी।

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